संस्कृति

विप्रजनों ने संस्कृत भाषा और संस्कृति रक्षा की शपथ ली

चाणक्य स्मृति दिवस,
चाणक्य स्मृति दिवस,विप्र वार्ता,
चाणक्य स्मृति दिवस,
चाणक्य स्मृति दिवस
चाणक्य स्मृति दिवस,
चाणक्य स्मृति दिवस

त्यागी,निस्वार्थी सलाहकार से ही राज्य का श्रेष्ठ संचालन संभव, चाणक्य स्मृति दिवस पर शपथ समारोह आयोजित

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प्रबोधिनी एकादशी

प्रबोधय अर्थात जाग्रत हो जाओ। उठो, आंखे खोलो, जीवन को कर्मपथ पर ले चलो। गीता के अनुसार हमारा धर्म कर्म पर आधारित है। धर्म तो कर्म पथ का दीप स्तंभ है जो प्रेरणा, स्फूर्ति एवं ताकत देता है। कर्म हीन मनुष्य धर्म शाल नहीं हो सकता.

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समाजिक एकता का प्रतीक उत्सव: होली

पंडित राघवेन्द्र पाठक,होली

हमारा देश संस्कृति प्रधान देश होने के साथ-साथ उत्सव प्रिय देश भी हैं। ‘‘उत्सव प्रियः खलु मनु याः’’ अर्थात् मनुश्य उत्सव प्रिय प्राणी है। उत्सव यानि मनुष्य को उन्नत बनाने वाला, द्विज बनाने वाला संस्कार मुक्त त्यौहार जन्मना, जायते शुद्रः संस्कारात् द्विज उच्यते इस प्रकार हमारे यहॉ हर उत्सव और त्यौह

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जनवरी साल का पहला महीना है

जय श्रीमन्नारायण,"ना तो जनवरी साल का पहला महीना है और ना ही 1 जनवरी पहला दिन। जो आज तक जनवरी को पहला महीना मानते आए है, वो जरा इस बात पर विचार करिए। सितंबर, अक्टूबर, नवंबर और दिसंबर क्रम से 7वाँ, 8वाँ, नौवाँ और दसवाँ महीना होना चाहिए जबकि ऐसा नहीं है। ये क्रम से 9वाँ, 10वाँ, 11वां और बारहवाँ महीन

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परिवार के जुड़ाव में रामायण की प्रासंगिकता

भारतीय संस्कृति कृषि प्रधान संस्कृति है । इस संस्कृति की सबसे बड़ी विशेषता है परिवार प्रेम । विश्व कवि श्री रवीन्द्र नाथ ठाकुर के शब्दों में रामायण घरेलू जीवन का महाकाव्य है । विश्व की किसी भी संस्कृति में परिवारिक आदर्शों पर आधारित रामायण जैसा महाकाव्य नहीं है ।

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हिन्दू संस्कृति में नारी का महत्व

भारतीय संस्कृति की यह महानता है कि उसमे ंप्रत्येक प्राणी का आदर प्रदान किया गया है । सभी प्राणियों में नारी का विशेष सम्मानजनक स्थान है। धर्मग्रंथों में उसे मातृदेवता कहा गया है जाया के रूप में नारी आद्या शक्ति है । ग्रन्थों में कहा गया है कि जिस घर में नारी का सम्मान नहीं होता, वहां देवता भी निव

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भगवान परशुराम के आदर्शो पर चलने का संकल्प

गौड़ विप्र समाज समिति
भगवान परशुराम
परशुराम जयंती मनाई
 बद्रीनाथजी मंदिर में भगवान परशुराम की महाआरती
आज ब्राह्मण संस्कृति लुप्त होती जा रही है
भृगुवंशी ब्राह्मण समाज का सामूहिक विवाह सम्मेलन
दीप प्रज्जवलन परशुरामजी की आरती,

देश में गूंजा भगवान परशुराम के आदर्शो पर चलने का संकल्प जगह- जगह जयंती समारोह सम्पन्न, गुडग़ांव । सेक्टर 23 के परशुराम भवन में परशुराम की विशाल प्रतिमा को पंचामृत से स्थान करवाकर श्रंृगार के साथ साथ पुष्प अर्पित किए गए । श्रृंगेरी विद्यापीठ के आचार्य रघुविन्द भट्ट एवं पंडित संतो, शर्मा शास्त्री क

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सामाजिक एकता और संस्कृति

ार्मिक सद्भाव, सहयोग पर्व, उत्सव , कला और साहित्य संस्कृति के अंग है । इनका आदान प्रदान संस्कृति एकता को जन्म देता है । संगठन की एकता अखण्डता एक समाज का जीवन और समृद्धि के लिए अनिवार्य है । जो समाज अपने पैरों पर खड़ा होना जानता है वह कभी परास्त नहीं हो सकता । जो समाज दूसरों पर निर्भर रहता है वह ल

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संस्कृत के विकास से प्राचीन गौरव

संस्कृत भाषा के विकास से ही भारत को विश्वगुरू का प्राचीन गौरव मिलेगा। भारत को अगर अपना प्राचीन गौरव हासिल करना है तो संस्कृत को प्रोत्साहन देना ही होगा। क्योंकि संस्कृत से ही संस्कृति का विकास हुआ है।यह विचार नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री बाबूलाल गौर ने एनआईटीटीटीआर में व्यक्त किए। वे यहाँ अखिल

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ईमानदारी पर नजर रखने वाली नजरों का अकाल

धन्य है हमारा देश जिसका संस्कृति सभ्यता और भाईचरा का हम गुणगान करते नहीं थकते । हमारे विरासत में हमें हारने की आदत मिली है । आज भी हम हार रहे हैं । अंतर इतना है कि पहले दूसरे हराते थे अब हम अपनों से हार रहे हैं हमारा देश विशाल है साथ ही महान भी जितने भगवान और संत हमारे यहां जन्म लिये उसके अनुपात

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