संस्कृति

वेद व संस्कृत की शिक्षा

Swami Jayendra Saraswati Amrit MahotsavaSwami Jayendra Saraswati Amrit Mahotsavaरायपुर । संस्कृत संस्कृति और सेवा तीनों का मिश्रण जरूरी है । वेद और संस्कृत की संयुक्त शिक्षा बचपन से ही देनी चाहिए। उक्त उद्गार आज यहां कांची कामकोठी पीठाधिपति जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी जयंत सरस्वती ने व्यक्त किए ।

अमृत महोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत देश अनेकता में एकता का उदाहरण है । उन्होंने छत्तीसगढ़ में भी वेद और संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना पर बल दिया । उन्होंने कहा कि संस्कृति की शिक्षा बचपन से देने से जीवन उसी के अनुसार बीतता है इसी से धर्मरक्षा और देश रक्षा होती है । जगदगुरू ने छत्तीसगढ़ राज्य में हो रहे सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए इसे एक आदर्श राज्यबताया । उनका मत था कि घोषणाओं पर व्यवहारिक रूप से काम होना चाहिए तभी जनता और देश का विकास होगा । सेवा क्षेत्र में त्रिवर्षीय चिकित्सलीय पाठ्यक्रम और नर्सिंग कोर्स को महत्वपूर्ण बताया ।

श्री चक्र महामेरूपीठम खम्हारडीह द्वारा सत्संग भवन दूधाधारी मठ में आयोजित अमृत महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस अवसर पर मैं यही प्रार्थना करता हूं कि सुख शांति के साथ छत्तीसगढ़ के विकास को गति मिले । मुख्य अतिथि की आसंदी से उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद हमारे लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक होगा हमारी कमियां भी इससे दूर होगी ।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष श्री धरम कौशिक ने कहा कि जगदगुरू का अमृत उत्सव छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है । छत्तीसगढ़ धर्म अध्यात्मक की भूमि है । राजिम में हुए कुंभ से इसकी देश में अलग पहचान बनी है ।

संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर लगातार संत महात्मा आकार आशीर्वाद देते रहे हैं आज का दिन हम सबके लिए सौभाग्य का है कि हमें अमृत महोत्सव के आयोजन का अवसर मिला । जगदगुरू की 75 वींवर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने उनके दीर्घायु शतायु होने की कामना की ।

स्वामी सच्चिदानंद ने अमृत महोत्सव समारोह आयोजन करने और उनके यहां आमगन के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ का सौभाग्य बताया । दण्डी स्वामी ने शासन से शंकराचार्य आश्रम हेतु भूमि एवं संस्कृत विश्वविद्यालय खोलने की मांग की । महंत रामसुन्दर दास ने उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि उनका आगमन धर्म के प्रति आस्था जगाएगा। सर्वब्राह्मïण समाज के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र पांडे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे ।

जगतगुरू शंकराचार्य श्री स्‍वामी जयेन्‍द्र सरस्‍वती अमृत महोत्‍सव कार्यक्रम संबंधित वीडियो देखने के लिए जयेन्‍द्रसरस्‍वती डॉट कॉम पर जायें।

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भगवान जगन्नाथ मंदिर में पाश्र्व देवलायों की प्राण प्रतिष्ठा

रायपुर । राज्यपाल शेखर दत्त गुरूवार को गायत्री नगर में श्री जगन्नाथ (मंदिर) सेवा समिति द्वारा आयोजित पाश्र्व देवता प्राण प्रतिष्ठा समारोह में शामिल हुए । श्री जगन्नाथ मंदिर के प्रांगण में नवनिर्मित पाश्र्व देवताओं श्री गणेश जी,मां समलेश्वरी, मां संतोषी, हनुमान जी, मां मंगला,मां लक्ष्मी, मां विमला, काशी विश्वनाथ, श्रीराम दरबार एवं सूर्य मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई ।

इस अवसर पर अपने उद्बोधन में राज्यपाल ने कहा कि जगन्नाथ मंदिर में पाश्र्व देवताओं की प्राण प्रतिष्ठïा रायपुर एवं छत्तीसगढ़ के लिए गौरवकी बात है । छत्तीसगढ़सदैव से आस्था एवं श्रद्धा का केन्द्र रहा है । उन्होंने कहा कि मनुष्य का धर्म एवं आस्था से अटूट रिश्ता रहा है और हर दिन एक धार्मिक दिन होता है । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सुसंस्कृत एवं धर्म प्रतिष्ठिïत प्रदेश है और यहां भगवान श्री जगन्नाथ जी के आगमन से सभी के मन में कीर्ति फैली है ।

कार्यक्रम के अध्यक्ष गजपति महाराजा दिव्य संहित देव ने भगवान श्री जगन्नाथ जी के प्राकटय उनकी महिमा के बारे में विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य की संस्कृति उत्कल संस्कृति से सामीप्य रखती है तथा इसके लिए राजनीतिक सीमाएं कभी बाधक नहीं हो सकती । उन्होंने कहा कि व्यक्ति की दिनचर्या की शुरूआत आस्था एवं ईश्वर से जुड़ी होनी चाहिए । उन्होंने कहा कि धर्म एकदूसरे को जोडऩे का कार्य करता है ।  read more »

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डॉ. यायावर की कृति का लोकार्पण

केन्द्रीय युवा मंत्री जितिन प्रसाद का विवाह

देश के सबसे युवा मंत्री मंडल के सदस्यों में शुमार पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्यमंत्री जितिन प्रसाद का विवाह लखनऊ की रहने वाली पूर्व टेलीविजन पत्रकार नेहा सेठ के साथ सम्पन्न हुआ । केन्द्र सरकार में मंत्री रहते विवाह करने वाले जितिन प्रसाद संभवत: देश के पहले नागरिक होंगे । विवाह समारोह में राहुल गांधी भी शामिल हुए । जितिन के विवाह के बाद केन्द्र सरकार में चार मंत्री बच जाएंगे जिनका की अभी तक विवाह नहीं हुआ है ।

डॉ. पाण्डेय को अवार्ड

रायपुर । भारतीय कृषि अनुसंधान संस्था,न इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरलरिसर्च नई दिल्ली में आयोजित 44 वें आईएसएई कन्वेशन में मुंगेली के अधिष्ठïाता डॉ. विनय पाण्डेय को कमेन्डेशन मेडल प्रदान किया गया । उन्हें यह अवार्ड कृषि इंजीनियरिंग के शैक्षणिक, अनुसंधन एवं विकास के क्षेत्र में उत्कृष्टï कार्यों के लिए केन्द्रीयकृषि मंत्री प्रो. केवी थामस के हाथों दिया गया ।

समाचार क्रांति के सम्पादक का सम्मान

दक्षिण बंगाल से अनवरत 32 वर्षों से एकमात्र हिन्दी भाषा में प्रकाशित समाचार क्रांति के प्रकाशन के लिए इस समाचार पत्र के संपादक इंद्र किशोर मिश्र को कलकक्ता में आयोजित कलकत्ता पुस्तक मेले में सम्वाद दर्पण पत्रिका की ओर से प्रशस्ति पत्र दे कर सम्मानित किया गया ।

श्री मिश्र को यह सम्मान आकाशवाणी कलकत्ता के केन्द्र निदेशक श्री प्रदीप कुमार मित्रा ने मेला प्रांगण के सभागार में दिया । इस अवसर पर कई अन्य बांगला साहित्य सेवी और कृतित्व पूर्ण व्यक्तियों का भी सम्मान किया गया ।

डॉ. यायावर की कृति का लोकार्पण

श्रुतसेवा निधि न्यास फिरोजाबाद का अक्षराभिषेकोत्सव 2010 का भव्य आयोजन संपन्न हुआ । विद्वानों, साहित्यकारों, समाजसेवियों और मेधावी छात्रों के भव्य अभिनन्दन के साथ इसमें तीन साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण भी हुआ । डॉ. रामस्नेही लाल शर्मा यायावर की शोधपरक कृति संस्कृति और साहित्य संबंधों के अन्त: सूत्र का लोकार्पण आयोजन के अध्यक्ष इंदौर से पधारे प्रमुख समाजसेवी साहित्य प्रेमी श्री सुरेशचन्द्र जैन ने किया । न्यास के संस्थापक प्राचार्य नरेन्द्र प्रकाश जैन ने कहा कि सामान्यत: हम सब डॉ. यायावर को एक मधुर गीतकार और सरस कवि के रूप में पहचानते है । प्रकाशित कृति ने उन्हें एक गवेषणापूर्ण चिन्तक और गंभीर मनीषी के रूप में प्रमाणित कर दिया है । इस भव्य व गंभीर कृति के लिए डॉ. यायावर को शॉल, स्मृति चिन्ह व कृति कार सम्मान देकर सम्मानित भी किया गया ।

स्मरणीय है कि न्यास वर्ष 2009 के आयोजन में डॉ. यायावर की कृति अहिंसा परमोधर्म: का लोकार्पण करके उन्हें मातृ वन्दना सम्मान भी किया जा चुका है ।

श्री मानस राम मंदिर में बैठक संपन्न  read more »

संतूर की खनक से सजी महफिल

रायपुर । संतुर वादन भातखंडे ललितकला शिक्षा समिति के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम के आज दूसरे दिन पं. शिव कुमार शर्मा का संतुर वादन और पं. उल्हास कलालकर का शास्त्रीय गायन प्रस्तुत किया ।

दोनों नामचीन कलाकारों की सुमधुर प्रस्तुति को संगीत प्रेमियों ने ध्यान से सुना । कालीबाड़ी रोड पर गुरुकूल परिसरमें शाम साढ़े 7 बजे आयोजित उक्त कार्यक्रम में पहले दिन प्रख्यात फिल्म अभिनेता और निर्देशक मनोज जोशी द्वारा निर्देशित नाटक चाणक्य का मंचन हुआ । इसे मुंबई के 27 कलाकारों की टीम ने मंचित किया था ।

इसी ंकी में आज शाम पदम विभूषण पं. शिव कुमार शर्मा ने जहां संतुर का कर्णप्रिय वादन प्रस्तुत किया वहीं शास्त्रीय संगीत के सुप्रसिद्द फनकार पं. उल्हास कशालकर ने शास्त्रीय गायन पेश किया ।

इस प्रस्तुति में तबला परसंगत करने केलिए मुंबई से पं. योगेश सम्सी और हारमोनियम पर संगत करने के लिए पं. सुधीर नायक विशेष तौर पर आए थे । तबला और हारमोनियम पर संगत करने वाले कलाकार भी काफी अनुभवी थे । सुगम संगीत के रसिकों ने देर रात तक कार्यक्रम का आनंद लिया ।  read more »

कुंभ का महत्व

कुंभ का पर्व चंद्रमा, सूर्य, तथा बृहस्पति ग्रहों के संयोग से होता है । चारो स्थान जैसे हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, प्रयागराज में जब पृथक पृथक रााशि में ग्रह एकत्रित होते हैं तब कुंभ होता है। बारह वर्ष में जो होता है वह कुंभ है । व छै: वर्ष में जो भरता है वह अर्ध कुंभ है । इस पर्व पर दान, व्रत, स्नान, भजन, सत्संग, सेवा तीर्थ स्नान, दान पुण्य , यज्ञ में कार्य किये जाने चाहिए ।

जहां कुंभ भरता है वहां पवित्र नदी मां है । इसी तरह हमारे छ.ग. में प्रतिवर्ष कुंभ का आयोजन होता है छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम में कुंभ का अपना विशेष महत्व है । राजिम भगवान कुलेश्वरनाथ की नगरी है । यहां कुंभ स्नान विशेष फलदायी होता है। कुंभ की कथा - एक बार देवता और दैत्यों ने मिलकर समुद्र मंथन किया जिसमें भगवान धन्वंतरी हाथ में अमृत कलश लेकर निकले । देवता और दैत्य दोनों ही उस अमृत कलश को लेना चाहते थे ।

तभी इंद्र का पुत्र जयंत उस अमृत कलश को लेकर भागा देवता उसका पीछा करने लगे बारह वर्षों तक देवता और दैत्यों में युध्द हुआ इसी बीच कलश हरिद्वार, नासिक, उज्जैन व प्रयागराज में यह कलश रखा गया व फिर उठाया गया इन स्थानों पर कलश से अमृत छलक जाने से इनका महत्व और बढ़ गया । इसे कुंभ पर्व कहते हैं । कुंभ में बड़े बड़े नागा साधु जो साधारणत: दिखाई नहीं देते वे कुंभ में दिखाई देत है प्रवचन, कथा महत्व, यज्ञ, तप, योग कर्म कुंभ में होते हैं । विशेष कर स्नानव पुण्य दर्शन लाभ कुंभ में होते हैं ।

अत: आप समस्त भक्त कुभ पर्व का जरूर लाभ उठाये इसका महत्व अपने आप में बहुत अधिक है ।
अमित शर्मा, विशेष संवादताता, रायपुर

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ऋषियों के नेतृत्व में होगी क्रांति-शंकराचार्य

रायपुर । सूझबूझ से परिपूर्ण सक्रिय राजनेताओं के हाथ में सत्ता की कमान होनी चाहिए । मोटी आमदनी आज राजनीति का पर्याय बन चुकी है । यह देश के लिए कलंक है । आध्यात्मिक ऋषि के मार्गदर्शन में दिशाहीन नेतृत्व को दिशा दें । उक्त बातें गोवर्धनमठ पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने समता कॉलोनी स्थित खाटू श्याम मंदिर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही ।

स्वस्थ क्रांति की आवश्यकता - सत्तालोलुप नेताओं की वजह से राष्ट्र के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है । देश को बचाने के लिए दिशाहीन शासनतंत्र को नियंत्रित करने की आवश्यकता है । दिशाहीन अर्थतंत्र घातक है । भारत का कच्चा माल विदेशों में जा रहा है । रक्षा शिक्षा एवं अर्थतंत्र कूटनीतिज्ञों के हाथ में चली गई है । देश की श्रीहीन होने से बचाने के लिए स्वस्थ क्रांति की आवश्यकता है ।

गिर रही तीर्थस्थलों की गरिमा - पुरी के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद ने कहा कि राजस्थान में पिछले कई वर्षों से कृष्ण की लीलास्थली नष्ट की जा रही है ।

टिहरी बांध के निर्माण के बाद से लगातार गंगाजल प्रदूषित होती जा रही है । तीर्थस्थलों की गरिमा लगातार गिर रही है । आज हिन्दुओं की चेतना विलुप्त हो रही है । ऐसी स्थिति में सहिष्णु बनाने वाला शासन तंत्र चाहिए ।

आरोप मुक्त हो संत - संत आसाराम बापू के संबंध में शंकराचार्य ने कहा कि संतों का जीवन आरोपमुक्त होना चाहिए। संतों का जीवन ऐसा होना चाहिए कि शासन ऊन पर आरोप लगाने की हिम्मत न कर सके । संतों को अपना व्यक्तित्व त्याग एवं तपस्या से बनाना चाहिए ।  read more »

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नरक के द्वार खोलता है खरमास

भारतीय पंचाग पध्दति में प्रतिवर्ष सौर पौष मास को खरमास कहते हैं ।इसे मलमास भी कहा जाता है । इस महीने का आरंभ 14 दिसंबर से होता है और ठीक मकर संक्रान्ति को खरमास की समाप्ति होती है । खरमास के दौरान हिन्दु जगत में कोई भी धार्मिक और मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं । इसके अलावा यह महीना अनेक प्रकार के घरेलू और पारंपरिक शुभ कार्यों की चर्चाओं के लिए भी वर्जित है ।

देशाचार के अनुसार नवविवाहिता कन्या भी खरमास के दौरान पति के साथ संसर्ग नहीं कर सकती और उसे इस पूरे महीने अपने मायके में आकर रहना पड़ता हौ । खरमास में सभी प्रकार के हवन, विवाह, चर्चा, गृह प्रवेश, भूमि पूजन, यज्ञोपवीत , विवाह या अन्य हवन कर्मकांड निषेध है। सिर्फ भागवत कथा या रामायण कथा का सामूहिक वर्ण ही खरमास में किया जाता है । ब्रह्म पुराण के अनुसार खरमास में मृत्यु को प्राप्त व्यक्ति नर्क का भागी होता है । व्यक्ति अल्पायु हो या दीर्घायु अगर वह पौष के स्तर मास की अवधि में अपने प्राण त्याग रहा है तो उसका इहलोक और परलोग नरक के द्वार की तरफ खुलता है ।

इसबात की पुष्टि महाभारत में होती है, जब खरमास में अर्जुन ने भीष्म पितामह को धर्म युध्द में बाणों की शैय्या पर लिटा दिया था । सैकड़ों बाणों से विध्द हो जाने के बावजूद भीष्म पितामह ने अपने प्राण नहीं त्यागे । इसका मूलकारम यही था कि अगर वह खरमास में प्राण त्यागते तो उनका अगला जन्म नर्क की ओर जाता । लिहाजा उन्होंने अर्जुन से एक ऐसा तीर चलाने के लिए कहा जो उनके सिर पर विध्द होकर तकिये का काम करे । इस तरह भीष्म पितामह पुरे खरमास में अर्ध्द मृत अवस्था में बाणों की शैय्या पर लेटे रहे और जब माघ मास की मकर संक्रान्ति आई उसके बाद शुक्ल पक्ष की एकादशी को उन्होंने अपने प्राण का त्याग किया ।

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कार्तिक दशमी पर होगा कंस का वध

शाजापुर । भारत में बुराईके प्रतीक रावण को जिस प्रकार से दशहरे के दिन जलाया जाता है उसी तरह से मध्यप्रदेश के शाजापुर शहर ेंदीपावली बाद दसवें दिन कार्तिक दशमी को कंसका वध हर्षोल्लास के साथ किया जाता है। कंस वधोत्सव समिति के दुर्गाशंकर मालवीय ने बताया कि दीपावली के बाद कार्तिक दसमी पर शहर में कंस वध किया जाता है । उन्होंने बताया कि पूरे देश मे ंब्रज भूमि मथुरा और प्रदेश के मालवा अंचल के शाजापुर शहरमेंकंस का वध किया जाता है।

शाजापुर में कंसवध का आयोजन लगभग 128 वर्षों से परंपरागत तरीके से किया जा रहा है । उन्होंने बताया कि कार्तिक दशमी के दिन देवताओं, राक्षसों, भगवान श्रीकृष्ण एवं बलराम के किरदारों के पात्रों का विशाल चल समारोह शहर के प्रमुख मार्गों से निकाला जाता है । चल समारोह के दौरान स्थानीय चौक बाजार में भगवान श्री कृष्ण एवं बलराम का राक्षसों से वाकयुध्द का संवाद होता है । संवादों के माध्यम से पात्र एक दूसरे पर हमला करते हैं श्री मालवीय ने बतायाकि कार्तिक दशमी पर निकाले जाने वाले चल समारोह के बाद कंस चौहारे पर 35 फीट ऊंचे मंच पर बनाये गए कंस के पुतले का वध रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण और बलराम द्वारा किया जायेगा ।

गुणवंत व्यास छत्तीसगढ़ी शास्त्रीय गायन

छत्तीसगढ़ी में पं. गुणवंत व्यास ने सुनाएं नये प्रयोग
रायपुर । रागदारी यानी शास्त्रीय संगीत, भाषा मुक्त विधा है, किसी भाषा के होने न होने से इसकी पेशकश प्रभावित होगी कहना कठिन है । फिर भी इसे प्रयोगात्मक नजरिये से देखने वालों के हौसले की दाद देनी होगी जो आगे बढ़ रहे हैं । श्री रामसंगीत महाविद्यालय में यह प्रयोग संक्षेपिता की तर्ज पर सुना गया । भातखण्डे ललित कला शिक्षा समिति के एक उपक्रम डॉ. अरूण कुमार सेन स्मृति शोध संस्थान में बतौर निदेशक प्रो. गुणवंत माधव लाल व्यास ने कुछ वर्ष पूर्व इस अनूठे छत्तीसगढ़ी प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाया था ।
बकायदा इसे छत्तीसगढ़ी सीडी और कैसेट सहित संग्रह की शक्ल में बाजार में उतारा भी गया । गुरत्तर गाले राग वाली उस छत्तीसगढ़ी प्रगतिशील योजना को फिलहाल कितनों ने अपनाया कहना कठिन है अलबत्ता छत्तीसगढ़ी प्रयोग के जनक प्रो. व्यास मिलने वाले मौकों पर रागदारी के छत्तीसगढ़ी स्वरूप को सुनाना नहीं भूलते ।  read more »

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युवा मन में जीवन साथी

अब वह जमाना चला गया जब माता- पिता जाकर अपने बच्चों को रिश्ता तयकर आते थे और बच्चे भी बिना कुछ पूछे पेरेट्स की पसंद के सात जीवन गुजार देते थे, वक्त ने करवट ली है और करवट ली है बच्चों की सोच नें –

आज की पीढ़ी अपने जीवन साथी को लेकर बिल्कुल अलग किसम के गुणों की तलाश में है । लेकिन सवाल यह है कि वह किस चीज की तलाश में है5-9 8गुणांक वह गुण क्या है , जो आज की पीढ़ी को लगता है कि उसके आदर्श साथी में होने चाहिए? 6जनवरी

गुणवत्ता नियंत्रण - लुक्स की चिन्ता करना छोड़ दें, आजकल बाहरी आवरण इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना कि व्यक्ति का चरित्र, आदर्श व्यक्ति वही होगा जो वफादारी और निष्ठा से भरा हो, आज की महिलाओं के लिए आर्थिक सुरक्षा भी बहुत महत्वपूर्ण है, आजकल लड़कियां स्वयं तो अपने कैरियर में स्थापित है ही और साथी भी ऐसा चाहती है जिसका मोटा बैंक बैलेंस हो और वह सुसंस्कृत भी
हो ।  read more »

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