संस्कृत भाषा को बढ़ावा

पेशे से शिक्षक रहे राष्ट्रीय अध्यक्ष पं.मांगेराम शर्मा ने देश की शिक्षा व्यवस्था में तीन बातों को प्रमुख रूप से शामिल करने पर जोर दिया । पहला तकनीकी आधारित शिक्षा, दूसरा अपनी भाषा और तीसरा आधारभूत संरचना ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में एक सैजी हो । हिन्दुओं और खासकर ब्राह्मणों की दयनीय हालत पर चिंता जताई और देश की शिक्षा पद्धति में ब्राह्मणों का सहयोग लेने पर जोर दिया ताकि बच्चे पुन: अपनी वैदिक संस्कृति से अवगत हो सके । उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में संस्कृत भाषा को बढ़ावा देनेआपने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर लाखो रूपये फूंके जा रहे हैं पर जब तक योग्य शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होगी तब तक प्राथमिक शिक्षा को आप मजबूत नहीं कर सकते । शासकीय स्कूलों में दी जा रही शिक्षा ौर उसकी गुणवत्ता पर असंतोष जताते हुए श्री शर्मा ने कहा कि सरकार स्कूलों में शिक्षा की स्थिति बदतर है वहां ज्यादातर बहुत गरीब तबके के विद्यार्थी स्टायफं पाने के लिए अध्ययन करते हैं बाकी लोग अपने बच्चों को निजी स्कूलों मे पढ़ाना उचित मानते हैं इसका एक प्रमुख कारण सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी व मूलभूत सुविधाओं का अभाव है । जबकि होना ये चाहिए कि शिक्षा का स्तर सभी वर्ग क बच्चों को समान रूप से मिले ।उन्होंने विदेशों में स्कूलिंग का उदाहरण देते हुए कहा वहां के सरकारी स्कूलों में बिना भेदभाव के अमीर सेगरीब सभी वर्ग के बच्चों को एक जैसी शिक्षा एक भवन में एक जैसी सुविधा के साथ प्रधान की जाती है। उन्होंने कहा हमारे देश में भी जरूरत है कि प्राथमिक शिक्षा के ढांचे में एकरूपता लायी जानी चाहिए । उन्होंने कहा कि जिस तरह निजी स्कूलों में बच्चों को कम्प्यूटर सहित अन्य सुविधाए ंप्रदान की जाती है उसी तरह शसाकीय स्कूलों में भी बच्चों को पर्याप्त अधोसंरचना उपलब्ध करायी जानी चाहिए । श्री शर्मा ने कहा एक ओर निजी स्कूलमें पढऩे वाले बच्चे आधुनिक सुविधा और अच्छे फर्नीचर पाठ्य सामग्री का उपयोग करते है ंवहीं शासकीय शालाओं में बच्चे जमीन पर आधी अधूरी सुविधाओं के सात ज्ञान अर्जन करते हैं इससे उनें स्वंय ही वर्ग भेद पैदा होने लगता है। वे निजी स्कूल में पढऩे वाले शहरी बच्चों की तुलना में हर क्षेत्र में पिछड़ते चले जाते हैं ।

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