सभ्यता

राजकाज पर लगाम -राजनैतिक ढांचा जरूरी

हमारा पूरा राजकाल और पूरी राज्य मशीनरी अपराध और उत्पीडऩ को लेकर असंवेदनशील है । समाज, सभ्यता और व्यवस्था को बर्बाद करने और चंद निहित स्वार्थों को आबाद करने का यह खेल भारतीय राजकाज का हिस्सा बन गया है । अपराध, न्याय, दंड और राजनीति से उभरती इस मानसिकता को सिर्फ लापरवाही या शासकीय कामकाज में अपवाद

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ईमानदारी पर नजर रखने वाली नजरों का अकाल

धन्य है हमारा देश जिसका संस्कृति सभ्यता और भाईचरा का हम गुणगान करते नहीं थकते । हमारे विरासत में हमें हारने की आदत मिली है । आज भी हम हार रहे हैं । अंतर इतना है कि पहले दूसरे हराते थे अब हम अपनों से हार रहे हैं हमारा देश विशाल है साथ ही महान भी जितने भगवान और संत हमारे यहां जन्म लिये उसके अनुपात

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