हमारी प्रवक्ता हो गई है

हमारी प्रवक्ता हो गई है 'विप्र-वार्ता' पत्रिका

हमारी प्रवक्ता हो गई है 'विप्र-वार्ता' पत्रिका

भारतीय समाज में एक व्यापक बहस छिड़ी है कि अज्ञानता के बंद दरवाजे खोलने के लिए आखिर हमें कैसी पत्र-पत्रिकाएं चाहिए? हमारी च्वॉइस क्या होनी चाहिए? एक तरफ वे प्रकाशन समूह हैं जो पाठकों को सेक्स-सर्वे परोस रहे हैं?

Tags: 

Subscribe to RSS - हमारी प्रवक्ता हो गई है