गीता सार

स्वधर्म पालन का दूसरा फल वैराग्य है धर्म से विरति जोग ते ज्ञाना और इसी प्रकार -
प्रथमहिं विप्र चरन अति प्रीति,
निज निज धर्म निरत श्रुति रीती।
तेहि कर फल पुनि विषय विरागा,
तब मम धर्म उपज विस्वासा।

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ब्राह्मण जोड़ो अभियान

अखिल भारतीय ब्राह्मण महासंघ के तत्वावधान में ब्राह्मण जोड़ो अभियान के तहत संत रति हत्रा का आयोजन संगठना आपल्या दारी अर्थात संगठन आपके द्वार पर के स्लोगन को लेकर 01 जनवरी 201& से &1 दिसम्बर 201& तक का एक कार्यक्रम राष्ट्रीय अध्यक्ष गोविन्द कुलकर्णी के नेतृत्व में कार्य किया गया ।

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आचार्य महावीर प्रसाद

जिस युग में फिल्मी अभिनेता- अभिनेत्रियों के इस्तेमाल किये हुए जूते और दुपट्टे सार्वजनिक नीलामी में बिकने का फैशन उपज आया हो, उसमें किसे यह जाकर देखने का समय अथवा उत्साह होगा कि कालजयी साहित्यके रचयिताओं की जन्म स्थली कहां और किस दिशा में है, क्या अभी भी वहां कहीं ऐसे लोग हैं जो उस रचनाकार के बारे

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प्रबोधिनी एकादशी

प्रबोधय अर्थात जाग्रत हो जाओ। उठो, आंखे खोलो, जीवन को कर्मपथ पर ले चलो। गीता के अनुसार हमारा धर्म कर्म पर आधारित है। धर्म तो कर्म पथ का दीप स्तंभ है जो प्रेरणा, स्फूर्ति एवं ताकत देता है। कर्म हीन मनुष्य धर्म शाल नहीं हो सकता.

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भूमि पूजन

रायपुर। खम्हरडीह कचना रोड शंकर नगर स्थित श्री सुरेश्वर महादेव पीठ परिसर में धार्मिक संस्कार के्द्र, सामाजिक सेवा केन्द्र सत्संग परिसर मंदिर जीर्णोद्धार समारोह अत्यन्त ही गरिमामय, भक्तिमय वातावरण में सम्पन्न हुआ। जिसमें प्रमुख रूप से महानिर्वाणी अखाड़े के स्वामी श्री गणेशानंद जी ने कहा कि इस तपो भ

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विप्र वाटिका उद्घाटित

पंडित बाल्मीकि शुक्ल स्मृति विप्र वाटिका उद्घाटित- बलौदाबाजार। पूरे देश में &9 प्रकार के ब्राह्मणों के साथ ब्राह्मण समाज सबसे बड़ा समाज है आज परिस्थितियों की मांग है कि हम सभी को एक होना चाहिए। यदि ब्राह्मण समाज ने अपने भले के लिए नहीं सोचा तो कोई भी अन्य नहीं सोच सकता। नगर में आज ब्राह्मण सम

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परिचय नाम -श्रीमती सावित्री बेन-

गुजराती ब्रह्म समाज

परिचय - नाम -श्रीमती सावित्री बेन- गौरीशकंर जोशी, पता- साधना लाज, गणेशरामनगर, मालवीय रोड, रायपुर, मो.

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सूर्योपासना और हमारा स्वास्थ्य

देव वह नहीं है जो सिर्फ पू’य है । देव वह है जो कल्याणकारी है । जो कल्याणकारी है, वही पू’य है। देवता की इस दार्शनिक परिभाषा में जो प्रकृति तत्व हमें प्रत्यक्ष दिखाई पड़ता है वह है सूर्य । सबको एक समान देखने वाला, सबके लिए उपकारी और उपयोगी उपभोगी दूसरा प्रकृति तत्व हमें प्रत्यक्ष नजर नहीं आता । ऐसे

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संपादक के नाम पत्र

मेरे द्वारा निवेदन करने पर विप्र वार्ता का जुलाई 1& का अंक अवलोकनार्थ हस्तगत हुआ। आपको कौटिश: धन्यवाद। पत्रिका को पढक़र बड़ा हर्ष तथ संतोष हुआ कि आप अपने प्रान्त से यह पत्रिका निकालकर ब्राह्मण वर्ग की सेवा में गत र्क वर्षों से तत्पर्य है। आप सभी वास्तव में बधाई के पात्र हैं। आशा ही नहीं वरन वि

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विप्र वार्ता हिंदी मासिक पत्रिका

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विप्र वार्ता नवम्बर १३ का अंक आपके करकमलो में होगा आशा है विप्र एकता को समर्पित इस पत्रिका की सदस्यता ,विज्ञापन रूपी सहयोग प्राप्त होगा

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