परिवार व समाज में सामंजस्य जरुरी

शक्ति छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण महिला समाज का पहला वार्षिक सम्मेलन विप्र भवन में आयोजित किया गया । इसमें मुख्य अतिथि के रुप में पूर्व प्राचार्य प्रो.

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कवि बसंत दीवान सम्मानित

छत्तीसगढ़ी एवं आदिवासी भाषा संस्कृति विकास संस्थान द्वारा प्रसिध्द कवि बसंत दीवान की रचनाशीलता के पचास वर्ष पूरे होने पर शाल, श्रीफल, और अभिनंदन पत्र से सम्मानित किया गया ।

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शुक्ला उपाध्यक्ष व मिश्रा सह-सचिव

कान्यकुब्ज सभा की पिछले दिनों बैठक हुई ।

इसमें कार्यकारिणी सदस्यों की सर्वसम्मति से गौरीशंकर शुक्ला को उपाध्यक्ष और सुरेश मिश्रा को सहसचिव नियुक्त किया गया ।

सभा के अध्यक्ष वीरेंद्र पांडे और सचिव राजेंद्र शुक्ला ने बताया कि राजेश मिश्रा को मीडिया प्रभारी नियुक्त किया गया है ।

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पुरस्कृत हुए मेधावी बच्चे - नर्मदा जयंती धूमधाम

नार्मदीय ब्राह्मण समाज ने गत म' फरवरी को नर्मदा जयंती धूमधाम से मनाई । मेधावी बच्चों को पुरस्कृत किया गया । समाज के लोगों ने मां नर्मदा की पूजा और विष्णु सहस्रनाम का पाठ किया ।

बुजुर्गों, नौकरी-व्यवसाय में पदोन्नति, उपलब्धि हासिल करने वालों का सम्मान किया गया ।

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जल प्रबंधन में प्रशंसनीय योगदान सम्मान

समाज सेवी, पर्यावरण चिंतक एवं जल प्रबंधन विशेषज्ञ श्री अभयराम तिवारी का जन्म पुराने बेमेतरा तहसील तथा वर्तमान में साजा तहसील के ग्राम खामडिह में म0 मार्च म'मम में हुआ । इनकी शिक्षा राजनांदगांव, रायपुर और सागर में हुई । म''म से म''0 के बीच तिवारी जी भिलाई इस्पात संयंत्र के जल प्रबंधन विभाग में कार

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साहित्यकारों का हुआ सम्मान

राष्ट्रभाषा प्रचार समिति का अधिवेशन रविवार को स्थानीय रामबाग में हुआ । इस अवसर पर राज्य के प्रथम विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल की जयंती के उपलक्ष्य में सुप्रसिध्द लेखक तथा पूर्व राज्यसभा सदस्य डा.

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वर्तमान युग में संस्कृत की अनिवार्यता

वर्तमान युग तकनीकी और कम्प्यूटर का युग माना जाता है । आज प्रत्येक व्यक्ति का दृष्टिकोण वैज्ञानिकता से परिपूर्ण है । व्यक्ति का मस्तिष्क नित्य प्रति ऐसे नियमों से आंदोलित रहता है, जो किसी-न-किसी खोज अथवा वैज्ञानिक प्रमाणों का ज्ञान कर सके । अब प्रश्न यह सामने आता है, कि दृष्टिकोण में वैज्ञानिकता क

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समग्र मानव जाति की रक्षा की कामना - महंत रामसुंदर दास

माटीपुत्र महंत श्री रामसुंदर दास का जन्म, म जून म'मम को छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा क्षेत्र के ग्राम पिहरीद में हुआ था । अपनी प्रारंभिक शिक्षा के पश्चात. आगे केी शिक्षा हेतु रायपुर आये और ऐतिहासिक दुधाधारी मठ में महंत स्व.

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भारत में विप्र आजीविका का साधन – एक चर्चा

भारत में विप्र वैदिक काल से अपने आजीविका का साधन मंदिरों में पुजा-अर्चना जजमानों के लिए पुजा कर खेती एवं शिक्षा दान जैसे कर्मों को परंपरागत रुप से उन्नत करते हुए आगे बढ़ते आ रहे हैं समय के साथ-साथ विप्रों ने अपनी भूमिका का सदैव उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है वह चाहे राजा-महाराजाओं के दरबार में नौ रत्नो

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होली में

नहीं मिलते, जिन्हें हम खोजते फिरते हैं, होली में,

हमारा दिल चुरा कर रख लिया है अपनी चोली में,

नहीं परवाह उन को है क हम पर क्या गुजरती है,

इसे वे बेरहम हंस कर उड़ा देते ठिठोली में,

खबर उन को नहीं शायद कि हम शैतान हैं ऐसे,

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