जिन्दगी बहती नदी – हिन्‍दी गज़ल

तलाशती है राहें, यदि संभावनाएँ ।
शुभकामनाओं के दिये, हम क्यों न जलाएँ ॥

भूलकर अंधियारों के सारे सितम ।
अवरोध पथ के हम हटाएँ ॥

क्या हुआ यदि नीड़ का बिखरा हो तिनका ।
नए सपनों का घर फिर हम सजाएँ ॥

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लेख आमंत्रित है

आदरणीय विप्रजनों सर्व युवा ब्राह्मण परिषद के द्वारा संकलपित मासिक पत्रिका विप्र-वार्ता का अंक आपके समक्ष है !

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विप्र एकता जिन्दाबाद-जिन्दाबाद !

युवा विप्र संकोच छोड़ो कब तक अपने आप में मशगुल रहोगे समाज के लिए आगे आओ ।

विप्र समुदाय हम काम में आगे रहता है अच्छे कार्य में लगी अन्य समाज के निगाहें हम पर है, टिकी है ।

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होली खुशियों की बोली

होली फिर आई है, हर साल आती है । आम के पेड़ों में बौर लग गए हैं । मौसम रंग बदल रहा है । गुनगुनी धूप के साथ सर्द हवाओं की सरगोशी अपने शबाब पर है । धूल, अंधड़ के साथ एक अलमस्त बयार । चहुंओर मौज का आलम ।

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वधू का सोलह श्रृंगार

पांचवा श्रृंगार - शादी का जोड़ा : उत्तर भारत में आम तौर से शादी के वक्त दुल्हन के काम से सुसज्जित शादी कातकाजा गलग जोड़ा (घाघरा, चोली और ओढ़नी) पहनाई जाती है । इसी तरह महाराष्ट्र में हरा रंग शुभ माना जाता है और वहां शादी केवक्त वक्त दुल्हन हरे रंग की साड़ी महाराष्ट्रियन शैली में बांधती है ।

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विप्रबंधु कृपया ध्यान दें

विप्र-वार्ता का अंक निरंतर पाठकों को मिल रहा है । वर्तमान में कुछ स्थानों से विप्र-वार्ता के नाम से अन्य व्यक्तियों द्वारा कुछ चंदे की रकम प्राप्त करने का समाचार जानकारी में आया है ।

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आजादी से बड़ा नहीं पद्मश्री - डॉ. महादेव पाण्डे

सरल, सौम्य और सहज व्यवहार के धनी श्रीपाण्डे को इस वर्ष केन्द्र सरकार ने पद्मश्री पुरस्कार देने का निर्णय लिया है । इस पर प्रतिक्रिया देते हुए वे कहते हैं कि यह जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि कतई नहीं बल्कि आजादी मिलना सबसे बड़ी उपलब्धि रही । राज्यपाल ई.एस.एल. नरसिम्हन और मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने डॉ.

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माघ पूर्णिमा पर मेले अनेक

माघ पूर्णिमा पर पड़ने वाले विभिन्न रंग-बिरंगे मेले अपनी अद्भुत छटा बिखेरते है । इन मेलों में प्रमुख है, राजिम का माघ मेला जो अब रुप लेता जा रहा है । इसके अतिरिक्त माघ पूर्णिमा पर आयोजित होने वाले और भी कई मेले हैं ।

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माघ - मड़ई मेंलों का महीना

उत्सवधर्मिता हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग रही है । छत्तीसगढ़ की संस्कृति में मड़ई मेलों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है । यहां पर स्थानीय जनभावना के अनुरुप मेलों-मंड़ईयों का आयोजन होता है ।

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