नववर्ष शुभकामना कविताएँ व रचनाऐं

शीर्षक एक बात अनेक
नववर्ष
नवयुवकों के लिए नई चेतना का
निर्दोषों के लिए न्याय का
नववधू के लिए सुखमय
वैवाहिक जीवन का हो ।

नववर्ष

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रुद्राक्ष के प्रति विदेशियों का बढा रुझान

भारतीय रुद्राक्ष परदेशियों को खासा आकर्षित कर रहा है । अर्धकुंभ मेले में आई विदेशी युवतियों में से अधिकांश को रुद्राक्ष धारण करते हुए देखा जा सकता है ।

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जयंती पर्व पर विशेष

पं अयोध्या प्रसाद दुबे आपके पिता श्री भुपत प्रसाद दुबे थे । मुल निवास स्थान ग्राम बटगन था । पलारी जिला रायपुर में 11 फरवरी 1923 को आपका जन्म हुआ था । सन् 1942 के आंदोलन में सक्रिय रुप से भाग लेने के फलस्वरुप कारावास हुआ था ।

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बसंत पंचमी विशेष - वीणावादिनी वर दे !

सरस्‍वती संस्‍कृत उवाच -
"साहित्य संगीत कला विहीन: साक्षात पशु: पुच्छविषाण हीन:"

अर्थात् हम अपने जीवन को पशुता से उपर उठाकर विद्या संपन्न, गुण संपन्न बनाएं, बसंत पंचमी इसी प्रेरणा का त्यौहार है ।।

सरस्‍वती पर्व बसंत पंचमी शिक्षा, साक्षरता, विद्या और विनय का पर्व है ।

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ज्योतिष प्रश्नोत्तरी : महिला ज्‍यातिषी श्रीमती चंद्रा पाण्डेय व्‍दारा

समाज सुधार के अगुवा बने

भारत की संस्कृति में तीन शब्दों में व्यक्त करना है तो कह सकते हैं कि हमारी संस्कृति है अर्पण, तर्पण और समर्पण । तीनों में त्याग है और यह त्याग कर्तव्‍य रूपी है, उपकार रुपी नहीं । अर्थात त्याग करके हम किसी पर उपकार नहीं करते । समाज के लिए किया गया त्याग अर्पण हैं, पितरों के लिए माता-पिता के लिये क

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स्वर्णिम अंक विशेष श्रृंखला

1. प्रवेशांक- छ.ग. में स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लेने वाले विप्र महापुरूषों का परिचय क्रमश: प्रारंभ ।
2. मई 06 - छ.ग. में परशुराम जयंती सामूहिक पूजा प्रारंभ
3. जून 06- योग्यता ही सफलता की सीढ़ी है -साक्षात्कार श्री वासुदेव दुबे सेवा निवृत्त पुलिस महानिदेशक

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राशि के अनुसार हो शिव पूजा

शिव पुराण के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग की उत्पत्ति हुई थी, इसीलिए इस दिन किया गया शिव पूजन, व्रत और उपवास अनंत फल दायी होता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार श्रध्दालु भक्त अपनी राशि के अनुसार भी भगवान शिव की आराधना और पूजन कर मनोवांछित फल प्राप्त कर सकते हैं । महाशिव रात्रि के दिन किसी भी र

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श्रीसिद्ध लक्ष्मी स्तोत्र

माता महा-लक्ष्मी की अनुभूत साधना / मन्त्र -
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प्रार्थनाः ॐ महा-लक्ष्मी नमस्तुभ्यं, गृह-वासो करोसि त्वम् ।
मन्त्रः ॐ महा-लक्ष्मी श्रीं श्रीं श्रीं काम-वीजाय फट् ।

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राम एक रामायण अनेक

राम कथा के प्रणेता के रूप में वाल्मीकि रामायण का नाम सर्वप्रथम लिया जाता है । वाल्मीकि रामयाण को स्मृत ग्रंथ माना गया है इस ग्रंथ की रचना माता सरस्वती की कृपा से हुई थी । इस ग्रंथ को ॠतम्भरा प्रज्ञा की देन बताया जाता है । रामायण की रचना संस्कृत भाषा में हुई है ।

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