प्रधान संपादक का दुखद निधन

Late Shri Shailendra Sharma Chief Editorविप्र वार्ता के प्रधान संपादक श्री शैलेन्द्र शर्मा का स्वर्

Tags: 

करवा चौथ - पति के दीर्घायु की कामना का व्रत

हमारी संस्कृति में व्रतों की परंपरा सदियों पुरानी रही है , यह करवा चौथ व्रत पति पत्नी के संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, किसी भी विवाहिता स्त्री के लिए करवा चौथ व्रत बहुत महत्वपूर्ण होता है ।

Tags: 

देवउठनी देवोत्थान एकादशी

आषाढ शुक्ल एकादशी को देव-शयन हो जाने के बाद से प्रारम्भ हुए चातुर्मास का समापन तक शुक्ल एकादशी के दिन देवोत्थान-उत्सव होने पर होता है। इस दिन वैष्णव ही नहीं, स्मार्त श्रद्धालु भी बडी आस्था के साथ व्रत करते हैं।

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है।

Tags: 

युवकों का यज्ञोपवीत संस्कार

कन्नौज - कान्यकुब्ज साथी संस्था के तत्वावधान में परशुराम जयंती समारोह इत्रनगरी में मनाई गई। कन्नौज में भगवान परशुराम की ननिहाल है, इस लिहाज से यहां इस पर्व को काफी श्रद्धा से मनाया जाता है। इस मौके पर ब्राह्मण परिवार के पांच युवकों का यज्ञोपवीत संस्कार भी कराया गया।

Tags: 

ब्राह्मणों का हुआ सम्मान

कोरबा । छत्तीसगढ़ सरयूपारीण द्विज परिवार का सम्मान समारोह जय मां भवानी गौशाला कुटुरमाल में किया गया ।

Tags: 

विश्व ब्राह्मण सम्मेलन 2011

सम्मेलन हैदराबाद मे 5-6 फरवरी 2011

विश्व ब्राह्मण संघ के तत्वावधान में हैदराबाद में ब्राह्मण सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है ।

Tags: 

मंगलकलश

कलश का पात्र जलभरा होता है । जीवन की उपलब्धियों का उध्दव आम्र की पत्तियों नागवल्ली द्वारा दिखाई पड़ता है जटाओं से युक्त ऊँचा नारियल ही मंदराचल है तथा यजमान द्वारा कलष के कंठ में बाँधा रक्षा सूत्र ही वासुकी है तथा यजमान और पुरोहित दोनों ही मंथनकर्ता है ।

Tags: 

दीप वर्तिक

काट जगत तिमिर पाश । न रहें रंचमात्र संत्रास ॥
अन्तस भर नव उच्छवास । बंदनवार सजे धरा आकाश ॥
शुभ्र ज्योत्स्त्रा दे ज्योति मालिके । जग आलोकित हो दीप वर्त्तिके ॥

Tags: 

धनतेरस - धन फेस्‍टीवल

कार्तिक कृष्ण त्रयोदषी को ही धनतेरस कहते है इस दिन नवीन पात्र खरीदने का बड़ा ही महात्व होता है।

Tags: 

अन्नकूट गोवर्धन पूजा

कार्तिक शुक्ल प्रतिदिन को गोवर्धन अन्नकूट और बलिराज नाम से पुकराते है। दिन भगवान श्री कृष्ण ने इंद्र के स्थान पर गोवर्धन की पूजा को प्रारंभ किया था इससे कुपित होकर इंददेव ने मूसलाधार जल बरसाया था इससे कुपित होकर इंद्रदेव ने मूसलाधार जल बरसाया था और श्री कुष्ण जी ने गोप और गोपियों को बचाने के लिए

Tags: 

Pages

Subscribe to Vipra Varta RSS