समस्त प्रतिनिधियों के निवेदन

कृपया आगामी परशुराम जयती विशेषांक हेतु अपने क्षेत्र से विप्रो के इस प्रमुख पर्व हेतु शुभकामना विज्ञापन प्राप्त कर प्रेषित करें। सभी सदस्यों की सदस्यता समाप्ति की ओर से कृपया विशेष ध्यान देकर सदस्यता निरंतर करवाने में मदद करें अन्यथा पत्रिका प्रेषित किया जाना संभव नहीं होगा। संपादक

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वर्ण व्यवस्था

वर्ण व्यवस्था -जन्म मूलक या कर्म मूलक-- ऋग्वेद के दसवें मण्डल के पुरूषसूक्त में शुद्र शब्द आया है इससे इस बात की पुष्टि होती है कि आज से लगभग 1500-1000 ईसा पूर्व अर्थात ऋग्वेदिक काल में वर्ण व्यवस्था का जन्म हुआ था। यह माना जाता है कि इस काल में समाज समतावादी था अर्थात समाज में छूआछूत का प्रचलन न

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घर से हो चरित्र निर्माण

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घर से हो चरित्र निर्माण तब होगा समाज-देश-महान --- भारत में आज भी सामाजिक सुरक्षा का काम परिवार करता है। जिस कारण भारत की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा बोझ नही पड़ता । परिवार केन्द्रित समाज की अर्थव्यवस्था होने के कारण से भारत की घरेलू बचत दर दुनिया में सब से ज्यादा 36 प्रतिशत है। जो भारत को समुचित विकास

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वर्तमान में ब्राह्मण नेतृत्व उसका अस्तित्व

भारतीय संस्कृति राजनीति एवं सामाजिक परिवेश प्रारंभ से ही ऋषिमुनियों एवं ब्राह्मणों से प्रभावित एवं संचालित रही है। प्राचीन काल में राजों महाराजों के सलाहकार एवं राज पुरोहित ब्राह्म वर्ग से ही हुआ करते थे.

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रामचरित मानस और मकर संक्राति

गोस्वामी तुलसीदास ने अपने मानस में मकर संक्रांति पर होने वाले इस सन्त समागम का इस प्रकार वर्णन किया है । माघ मकरगत रवि जब होई, तीरथपतिहि आव सब कोई।
देव दनुज किन्नर नर श्रेनी, सादर मञ्जहि सकल त्रिवेनी।।
पूजहि माधव पद जल जाता, चरिस अरवय बटु हर सहिं गाता।

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मकर संक्रांति : उत्तरायण का पर्व

हमारा देश धर्म और प्रकृति प्रदान है। अत: यहां के हर पर्व प्रकृति से जुड़े होते है। प्रकृति हमारे जीवन में ही नहीं हमारी परंपराओं में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यही कारण है कि हमारे हर त्यौहार ऋतुओं के अनुसार ही आते है। इसी क्रम में मकर संक्रांति का पर्व भी मूलत: प्रकृति से जुड़ा पर्व है । संक्र

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कवि प्रदीप - श्री रामचन्द्र दुबे

इस समय जब कवियों की बाढ़ सी आ गई है जिन्हें मंचो ंपर अपनी रचनाएं पढक़र बोलनी पड़़ती है । ऐसे मे इसी युग के एक कालजयी गीतों के रचनाकार याद आ रहे हैं। इन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में अप्रत्यक्ष रूप से पुरानी फिल्म किस्मत जो द्वितीय महायुद्द साठ साल पूर्व के समय रिलीज हुई थी उसका वह गीत दूर हटो ए

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गर्भाधान संस्कार पहला संस्कार

गर्भाधान संस्कार सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस

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