कविता----- बालकवि बैरागी

एक बात के लिये जो उम्र भर जिन्दा रहे
और वो भी ना मिले तो बहुत शर्मिन्दा रहे
उस दीप ऐ मैं कह रहा हूं इस तरह रोओ नहीं
अच्छी भली इस उम्र को इस तरह खोओ नहीं
स्नेह को साधे बिना धरती नहीं हिल पाएगी
आग को जिन्दा रखो सौ बााितयां मिल जाएंगी।

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विप्रवार्ता जनवरी 14 का अंक

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विप्रवार्ता जनवरी 14 का अंक आपके हाथो में शीघ्र पहुचेगा उम्मीद है की नयी सुचनायो और जानकारियों से परिपूर्ण यह अंक आपको पसंद आएगा ,आपकी सदस्यता लंबित है सदस्यता शुल्क २५१ रुपये जमा करे ,प्रतिनिधि बनने उत्सुक विप्र जन संपर्क करे ९८२७१३५०५५

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संतान कामना उपाय

1. शिव भक्ति के किसी भी दिन । हिन्दू पंचांग की प्रदोष तिथि ;हिन्दू माह की द्वादशी.त्रयोदशी योग या त्रयोदशी तिथिद्धए चतुर्दशी व सोमवार यथासंभव व्रत रखें। शाम के वक्त एक समय भोजन करें या उपवास रखें।

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चाणक्य विद्या पीठ के वार्षिक उत्सव

चाणक्य विद्या पीठ के वार्षिक उत्सव में शामिल होने के लिए श्री सुभाष शर्मा ने विकास उपाध्याय और अजय त्रिपाठी को आमंत्रित किया बच्चो की प्रतिभा देख प्रभावित हुए इस अवषर पर श्री श्याम बेश भी उपश्थित थे

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तुलसी और साहित्य

विश्व प्रसिद्ध एवं पूज्य महान महाकाव्य श्री राम चरित मानस विश्व साहित्य की सर्वोत्तम कृति है। गोस्वामी जील ने इसकी रचना करते समय अनेक प्रकारकी बातों को ध्यान में रखा होगा। उदाहरणार्थ शब्द योजना । गोस्वामी जी ने अनेक शब्द मानस में इस प्रकार से रखे कि उनका वास्तविक अर्थ एवं गोस्वामी जी का उद्देश्य

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बन्दर बांट हो गया

जो राजस्व जहां से आया, उसका बन्दर बांट हो गया।
देसके पहेदारों ने ही, देश का बंटाढार कर दिया।
कागज पर योजना बन गई, कागज पर सब काम हो गये।
विज्ञापन विकास के नारे, अखबारों के शीर्ष बन गये।
सेवा की भावना मिट गई, राजनीति व्यापार हो गया
जो राजस्व....।

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संबंध अनुबंध हिंदी कविता

हमारे तुम्हारे प्यार के सेतु को जोड़ता हुआ ये संबंध
समन्वय पर आधारित है ये अनुबंध
पवन में ज्यों मन्द घुली रहती है ये गन्ध
गीतों में ज्यों कसा रहता है छन्द
स्वर लहरियों मे ंवंशी की आत्मा है ज्यो रंन्ध्र
प्रेम और विश्वास को समर्पित है ये निबंध

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विनम्रता एक अनिवार्य गुण

स्वयं की उपलब्धियों एवं सम्मान के भाव को मिटाकर मैं भाव से रहित एवं नत भाव से युक्त होकर हृदय में विद्युत के समान तत्परता एवं उत्साह का समायोजन करके जब हम अपने सम्मुख आए व्यक्ति का सम्मान करते हैं तब हमारे इस स्थायी भावजनित व्यवहार को विनम्रता कहते हैं।जब हम स्वयं को सामने खड़े व्यक्ति से तुच्छवर

ब्राह्मण समाज का धरना प्रदर्शन

फिरोजाबाद। परशुराम द्वार की मांग को लेकर ब्राह्मण समाज का धरना प्रदर्शन रविवार को गांधी पार्क में शुरु हो गया। नगर पालिका पर निर्माण कार्य अधर में लटकाने का आरोप लगाते विप्र समाज ने जमकर नारेबाजी की। धरना स्थल से गुजरे प्रोफेसर साहब ने रुककर इनकी बात सुनने का भी मन बनाया, लेकिन प्रोफेसर साहब को ध

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षष्टि- व्रत वर्जनम्

।। ऊँ ऐं नम: ऊँ ।। सङ्गच्छध्वं सं वद्धं सं वो मनासि जानताम् ।-देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते ।। आप परस्पर मिल जुलकर चलें, परस्पर मिलकर स्नेह पूर्वक वार्तालाप करें। आपके मन समान विचारधारा वाले होकर ज्ञानार्जन करे। जिस प्रकार पूर्व काल में सज्जनों ने एक साथ मिलकर यज्ञादि कार्यों को करते हुए

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