रामचरित मानस और मकर संक्राति

गोस्वामी तुलसीदास ने अपने मानस में मकर संक्रांति पर होने वाले इस सन्त समागम का इस प्रकार वर्णन किया है । माघ मकरगत रवि जब होई, तीरथपतिहि आव सब कोई।
देव दनुज किन्नर नर श्रेनी, सादर मञ्जहि सकल त्रिवेनी।।
पूजहि माधव पद जल जाता, चरिस अरवय बटु हर सहिं गाता।

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मकर संक्रांति : उत्तरायण का पर्व

हमारा देश धर्म और प्रकृति प्रदान है। अत: यहां के हर पर्व प्रकृति से जुड़े होते है। प्रकृति हमारे जीवन में ही नहीं हमारी परंपराओं में भी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। यही कारण है कि हमारे हर त्यौहार ऋतुओं के अनुसार ही आते है। इसी क्रम में मकर संक्रांति का पर्व भी मूलत: प्रकृति से जुड़ा पर्व है । संक्र

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कवि प्रदीप - श्री रामचन्द्र दुबे

इस समय जब कवियों की बाढ़ सी आ गई है जिन्हें मंचो ंपर अपनी रचनाएं पढक़र बोलनी पड़़ती है । ऐसे मे इसी युग के एक कालजयी गीतों के रचनाकार याद आ रहे हैं। इन्होंने अंग्रेजों के शासनकाल में अप्रत्यक्ष रूप से पुरानी फिल्म किस्मत जो द्वितीय महायुद्द साठ साल पूर्व के समय रिलीज हुई थी उसका वह गीत दूर हटो ए

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गर्भाधान संस्कार पहला संस्कार

गर्भाधान संस्कार सनातन अथवा हिन्दू धर्म की संस्कृति संस्कारों पर ही आधारित है। हमारे ऋषि-मुनियों ने मानव जीवन को पवित्र एवं मर्यादित बनाने के लिये संस्कारों का अविष्कार किया। धार्मिक ही नहीं वैज्ञानिक दृष्टि से भी इन संस्कारों का हमारे जीवन में विशेष महत्व है। भारतीय संस्कृति की महानता में इन संस

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कविता----- बालकवि बैरागी

एक बात के लिये जो उम्र भर जिन्दा रहे
और वो भी ना मिले तो बहुत शर्मिन्दा रहे
उस दीप ऐ मैं कह रहा हूं इस तरह रोओ नहीं
अच्छी भली इस उम्र को इस तरह खोओ नहीं
स्नेह को साधे बिना धरती नहीं हिल पाएगी
आग को जिन्दा रखो सौ बााितयां मिल जाएंगी।

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विप्रवार्ता जनवरी 14 का अंक

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विप्रवार्ता जनवरी 14 का अंक आपके हाथो में शीघ्र पहुचेगा उम्मीद है की नयी सुचनायो और जानकारियों से परिपूर्ण यह अंक आपको पसंद आएगा ,आपकी सदस्यता लंबित है सदस्यता शुल्क २५१ रुपये जमा करे ,प्रतिनिधि बनने उत्सुक विप्र जन संपर्क करे ९८२७१३५०५५

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संतान कामना उपाय

1. शिव भक्ति के किसी भी दिन । हिन्दू पंचांग की प्रदोष तिथि ;हिन्दू माह की द्वादशी.त्रयोदशी योग या त्रयोदशी तिथिद्धए चतुर्दशी व सोमवार यथासंभव व्रत रखें। शाम के वक्त एक समय भोजन करें या उपवास रखें।

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चाणक्य विद्या पीठ के वार्षिक उत्सव

चाणक्य विद्या पीठ के वार्षिक उत्सव में शामिल होने के लिए श्री सुभाष शर्मा ने विकास उपाध्याय और अजय त्रिपाठी को आमंत्रित किया बच्चो की प्रतिभा देख प्रभावित हुए इस अवषर पर श्री श्याम बेश भी उपश्थित थे

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तुलसी और साहित्य

विश्व प्रसिद्ध एवं पूज्य महान महाकाव्य श्री राम चरित मानस विश्व साहित्य की सर्वोत्तम कृति है। गोस्वामी जील ने इसकी रचना करते समय अनेक प्रकारकी बातों को ध्यान में रखा होगा। उदाहरणार्थ शब्द योजना । गोस्वामी जी ने अनेक शब्द मानस में इस प्रकार से रखे कि उनका वास्तविक अर्थ एवं गोस्वामी जी का उद्देश्य

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बन्दर बांट हो गया

जो राजस्व जहां से आया, उसका बन्दर बांट हो गया।
देसके पहेदारों ने ही, देश का बंटाढार कर दिया।
कागज पर योजना बन गई, कागज पर सब काम हो गये।
विज्ञापन विकास के नारे, अखबारों के शीर्ष बन गये।
सेवा की भावना मिट गई, राजनीति व्यापार हो गया
जो राजस्व....।

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