Sanskrit

विश्व देव्यै नमो नम:

जम्बू द्वीपस्थ कैलासे गौरी कुण्डस्य पार्वती ।
यूरेशिया महाद्वीपे शक्ति देव्यै नमो नम: ॥ 1 ॥

जापान सागरे प्लक्षे पर्वताकार शोभिता ।
शिव शक्ति स्वरूपाय श्रद्धा देव्यै नमो नम: ॥ 2 ॥

मैक्सिको देश आश्चर्यम् शाल्मली द्वीप मंदिरे ।  read more »

वेद व संस्कृत की शिक्षा

Swami Jayendra Saraswati Amrit MahotsavaSwami Jayendra Saraswati Amrit Mahotsavaरायपुर । संस्कृत संस्कृति और सेवा तीनों का मिश्रण जरूरी है । वेद और संस्कृत की संयुक्त शिक्षा बचपन से ही देनी चाहिए। उक्त उद्गार आज यहां कांची कामकोठी पीठाधिपति जगदगुरू शंकराचार्य स्वामी जयंत सरस्वती ने व्यक्त किए ।

अमृत महोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत देश अनेकता में एकता का उदाहरण है । उन्होंने छत्तीसगढ़ में भी वेद और संस्कृत विश्वविद्यालय की स्थापना पर बल दिया । उन्होंने कहा कि संस्कृति की शिक्षा बचपन से देने से जीवन उसी के अनुसार बीतता है इसी से धर्मरक्षा और देश रक्षा होती है । जगदगुरू ने छत्तीसगढ़ राज्य में हो रहे सेवा के कार्यों की सराहना करते हुए इसे एक आदर्श राज्यबताया । उनका मत था कि घोषणाओं पर व्यवहारिक रूप से काम होना चाहिए तभी जनता और देश का विकास होगा । सेवा क्षेत्र में त्रिवर्षीय चिकित्सलीय पाठ्यक्रम और नर्सिंग कोर्स को महत्वपूर्ण बताया ।

श्री चक्र महामेरूपीठम खम्हारडीह द्वारा सत्संग भवन दूधाधारी मठ में आयोजित अमृत महोत्सव को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने कहा कि इस अवसर पर मैं यही प्रार्थना करता हूं कि सुख शांति के साथ छत्तीसगढ़ के विकास को गति मिले । मुख्य अतिथि की आसंदी से उन्होंने कहा कि संतों का आशीर्वाद हमारे लिए प्रेरणा और मार्गदर्शक होगा हमारी कमियां भी इससे दूर होगी ।

समारोह की अध्यक्षता करते हुए विधानसभा अध्यक्ष श्री धरम कौशिक ने कहा कि जगदगुरू का अमृत उत्सव छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का अवसर है । छत्तीसगढ़ धर्म अध्यात्मक की भूमि है । राजिम में हुए कुंभ से इसकी देश में अलग पहचान बनी है ।

संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस अवसर पर कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती पर लगातार संत महात्मा आकार आशीर्वाद देते रहे हैं आज का दिन हम सबके लिए सौभाग्य का है कि हमें अमृत महोत्सव के आयोजन का अवसर मिला । जगदगुरू की 75 वींवर्षगांठ के अवसर पर उन्होंने उनके दीर्घायु शतायु होने की कामना की ।

स्वामी सच्चिदानंद ने अमृत महोत्सव समारोह आयोजन करने और उनके यहां आमगन के लिए उनका आभार व्यक्त करते हुए इसे छत्तीसगढ़ का सौभाग्य बताया । दण्डी स्वामी ने शासन से शंकराचार्य आश्रम हेतु भूमि एवं संस्कृत विश्वविद्यालय खोलने की मांग की । महंत रामसुन्दर दास ने उनके स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करते हुए कहा कि उनका आगमन धर्म के प्रति आस्था जगाएगा। सर्वब्राह्मïण समाज के अध्यक्ष श्री वीरेन्द्र पांडे विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे ।

जगतगुरू शंकराचार्य श्री स्‍वामी जयेन्‍द्र सरस्‍वती अमृत महोत्‍सव कार्यक्रम संबंधित वीडियो देखने के लिए जयेन्‍द्रसरस्‍वती डॉट कॉम पर जायें।

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गुरू पादुका सहस्रनाम का विमोचन

श्री सच्चिदानंद तिर्थ जी के द्वारा गाए गये गुरू पादुका गुरू सहस्रनाम का विमोचन राजिम महाकुंभ के उद्धघाटन पर्व पर संपन्‍न हुआ। गुरू पादुका गुरू सहस्रनाम श्री सच्चिदानंद जी महाराज के सुर में सुनिये  read more »
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संस्कृत के प्रति हमारे युवाओं का प्रेम-लगाव जरूरी

प्राचीन संस्कृति का हिमायती समाज यह जान ले कि देववाणी और दिव्य भाषा जैसे विशेषणों से सुसज्जित संस्कृत भाषा लगभग निष्क्रिय पड़ी है । वैज्ञानिक भले ही इसे कं म्प्यूटर के लिए विश्व की सर्वश्रेष्ठ भाषा स्वीकारते हों लेकिन सच्चाई यह है कि सरकार भी इसे दो कौड़ी की भाषा समझती है । संस्कृत भाषा आज अपने अस्तित्व के लिए छटपटा रही है ।

राज्य सरकारों ने जहां इस भाषा के विकास के कार्यक्रम को क्रियाकर्म में तब्दील कर दिया है, वहीं केन्द्र सरकार का नजरिया भी कमोबेश ऐसा ही है । मानव संसाधन मंत्रालय का संस्कृत विभाग मृतप्राय सा पड़ा है ।

उत्तर प्रदेश में पहले इंटरमीडिएट स्तर तक संस्कृत की शिक्षा दी जाती थी जिससे आयुर्वेद पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सहूलियत हो । यही हाल दिल्ली विश्वविद्यालय में हिन्दी पाठयक्रमके साथ संस्कृत शिक्षा अनिवार्य थी लेकिन अब यह अनिवार्यता खत्म हो चुकी है । राज्य स्तर पर जो संस्कृत स्कूल हैं उनके भवनों की दशा खराब है और शिक्षकों को वेतन भी समय पर नहीं मिल रहा है । विभिन्न राज्यों के संस्कृत विद्यालयों से छात्र नदारद हैं ।  read more »

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वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ व्रतबंध

समता सोसायटी प्रांगण में छत्तीसगढ़ी ब्राह्मण समाज केन्द्रीय समिति द्वारा आज सामूहिक व्रतबंध समारोह का आयोजन किया गया । यहां वैदिक मंत्रोच्चार के साथ25 ङ्खह्न बटुकों का व्रतबंध संपन्न हुआ । पूर्ण ब्र्राह्मणत्व प्राप्ति के लिए जनेउ धारण समारोह मे बच्चों के साथ ही परिजन उत्साह के साथ पहुंचे । शुभारंभ भगवान परशुराम तथा माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के साथ हुआ । वैदिक धार्मिक परम्परानुसार मंडपाच्छादन, हरिद्रालेपन, बटुकों का पूजन, मुंडन, जनेउ धारण कराया गया । यहां माहौल शादी जैसा रहा ।

बच्चों को ठीक उसी तरह हल्दी लगाई जिस तरह शादी के मौके पर लगाई जाती है । बटुकों की माताएं इस कार्य में जुटी हुई दिखाई पड़ी । यहां मुख्य जजमान बिहारीलाल शर्मा व धर्मपत्नी सुनीता शर्मा थी ।

कार्यक्रम के मुख्य पंडित ओमप्रकाश शर्मा थे । संचालर्नकत्ता प्रांताध्यक्ष डॉ. प्रकाशनारायण शुक्ला, ललित मिश्रा, बोधन पांडे, राजेश शर्मा, सतीश शर्मा, अशोक शर्मा, सुरेन्द्र शुक्ला, मंजू शर्मा, धनंज य त्रिपाठी, प्रमोद तिवारी, रमादेवी शर्मा, नीरजा शर्मा, भारती शर्मा, डॉ. संध्या तिवारी, सतानंद शर्मा, रामविशाल शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे ।  read more »

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Sanskrit Saptah Om Baba Speaking

Om Baba Speech in Sanskrit Weekend in Ashirwad Bhawan Raipur, Chhattisgarh.

अमेरिका में संस्कृत की कक्षा

डॉ. श्यामनारायण शुक्ला (मेरे भइया) एवं उनकी पत्नी श्रीमती निर्मला शुक्ला दोनों मिलकर एक साथ रविवारको मंदिर में संस्कृत की कक्षा चलाते हैं । वर्तमान में वे फ्रीमांट नामक शहर में निवासरत है । फ्रीमांट नामक शहर सेनफ्रांससिको से 30 मील की दूरी पर स्थित है ।

यह बे एरिया क्षेत्र कहलाता है। डाँ. शुक्ला 1960 में एस.डी.ओ. की पी.डब्ल्यू. डी. की नौकरी छोड़कर आगे की पढ़ाई के लिए केनेडा चले गये । वहां उन्होंने एम.ई. एवं पी-एच.डी. की पढ़ाई पूर्ण किया एवं हमेशा के लिए यू.एस.ए. में फ्रीमांट में बस गये । अब वहां तीन छोटे भाइयों के साथ 32 सदस्यीय परिवार निवासरत है । फ्रीमांट में बहुत से प्रवासी भारतीय निवास करते हैं । डॉ. शुक्ला वहां के इंडियन एसोसियेशन के अध्यक्ष हैं ।  read more »

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