Society

Dhananjay Tripathi's picture

लोकतंत्र बदलता जातितंत्र

अधिकार प्राप्ति के लिए कत्र्तव्यपरायणता जरूरी

सामाजिक कत्र्तव्य तो अनंत है । एक अनुशासित समाज का निर्माण तभी हो सकता है जब समाज का प्रत्येक सदस्य अपनी जिम्मेदारी को समझे और उसका पूरा निर्वाह करे । जब हम पुरी निष्ठï से अपने कत्र्तव्य का पालन करेंगे तो अधिकार स्वत: मिल जाता है । आज कत्र्तव्य और अधिकार में पुरी नैतिकता के सात सामंजस्य बैठाने की जरूरत है ।

इसे जानकर हमें अपने कत्र्तव्यों को समझना और करना आवश्यक है । हम सभी विप्र समाज के बुद्धि वादी माने जाने वाले युवा हैं । हम समाजों के नेतृत्वकर्ता हैं हम समाजों को दिशा देने वाले हैं, हम धार्मिक प्रगतिवादी चिंतक हैं । हमारे कत्र्तव्यों में, हमें समाज निर्माण की महति भूमिका का निर्वहन करना है । आज राजनीति दूषित होती जा रही है । व्यक्तिवादी सोच हावी है । वह समाजों को बांटकर टुकड़े टुकड़े कर अपना राजनीतिक स्वार्थ सिद्ध करने किसी भी हद तक जाने आमदा है ।

अभी पिछले दिनों देश की जनगणना का कार्य प्रारंभ हुआ । पहली बार विस्तारित , आर्थिक अंकेक्षण भी
साथ में किया जा रहा है । यह सबको मालूम है कि हमारे देश में हर 10 वर्ष में जनगणना होती है ये पूरी पारदर्शिता के साथ यथा संभव सभी तक सूचना पहुंचाकर की जाती है ।

लेकिन वाह रे राजनीति और हमारे स्वार्थी नेता अपने - अपने स्वार्थों के लिए हल्ला बोल दिया । संसद नहीं चलने दी । हमारे समाजों को बांटने दुनिया के आदर्श लोकतंत्र को कलंकित करने, जाति आधारित जनगणना करने की मांग करते रहे । भला हो उन अधिकारियों का कुछ नेताओं का जिन्होंने अब तक ऐसा आदेश जारी नहीं किया है । वरना हमारा लोकतंत्र हो जाता जातितंत्र ।  read more »

Hemant Tiwari's picture

देवी शक्ति के देश में कन्या भ्रूण की हत्या ?

भारत में कन्या भ्रूण हत्या का बढ़ता चलन, प्रश्र उठता है कि जिस देश के लोग साल में दो बार नवरात्रि पर्व पर मां देवी शक्ति की उपासना कर कन्याओं का पूजन करते हैं उन्हें शक्ति का स्वरूप मानते हैं, लक्ष्मी मानते हैं , वहीं लोग कन्या के जन्म की सम्भावना से ही दुखी क्यों हो रहे हैं ? उन्हें शक्ति का स्वरूप मानते हैं, लक्ष्मी मानते है, वहीं लोग कन्या के जन्म की संभावना से ही दु:खी क्यों हो रहे हैं इस दुख से मुक्ति का रास्ता भी लोगों ने बड़ा वीभत्स चुना है ।कन्या जन्म को ही अवरूद्ध कर दिया जाता है और उसकी भ्रूण में ही हत्या कर दी जाती है ।

प्रश्र यह है कि नारी तो जन्म देने वाली है, वही जीवन लेना कब से सीख गई ? नारी अपने ही नारीत्व की गरिमा कैसे भूल गई ? कन्या पैदा होते ही माता पिता को चिंता होने लगती है कि इसका विवाह कैसे होगा , कैसा घर द्वार मिलेगा, वहां सुखी रहेगी या नहीं ? फिर शादी विवाह में वर पक्ष की मांगे सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है । इस स्थिति में किसी गरीब माता पिता के लिये अपनी पुत्री का विवाह बोझ हो जाता हैं। ऐसे में समाज को अभी चेतना होगा और यह संकल्प लेना होगा कि दुल्हन ही दहेज है वरना वह दिन भी आ सकता है जब दहेज तो क्या दुल्हन भी मिलना मुश्किल हो जायेगा ।

यह भी देखा गया है कि कन्या भू्रण हत्या जितनी अधिक भारत एवं तीसरी दुनिया के देशोंमें होती है उतनी पश्चिमी देशों में नहीं होती है । जबकि भ्रूण परीक्षण और गर्भपात विषयक चिकित्सकीय प्रौद्योगिकी पश्चिम में पहले आई है । इसका साधारण सा अर्थ है कि यह पाप लोग चिकित्सकीय प्रौद्योगिकी की वजह से नहीं एक गलत मानसिकता के कारण कर रहे हैं । किस वर्ग के लोग कन्या भ्रूण करवाते हैं ? एक डॉक्टर का मत है कि मध्यम एवं उच्च वर्ग के लोग कन्या भ्रूण हत्या अधिक करवाते हैं । इसके दो कारण हैं एक तो वे पुत्र मोह में अधिक रहते हैं और दूसरा उनके पास पैसा है । गर्भपात कराना थोड़ा खर्चीला है इसलिए गरीब आदमी तो गर्भपात कराता ही नहीं है और वह संतान को भगवान की देन मानता है । अत: बेटा बेटी के चक्कर में वह पड़ता ही नहीं है ।  read more »

बावीसा ब्राह्मण समाज इंदौर का सामूहिक विवाह समारोह

आप सभी सम्मानीय महानुभावों के बहुमूल्य सामयिक एवं अति उदार सार्थक सहयोग से संपन्न सामूहिक मंगल परिणयों से अभिप्रेरित होकर इस वर्ष भी 7 फरवरी 2010 रविवार फाल्गुन कृष्ण नवमी विक्रम संवत 2066 को 15 वां सामूहिक मंगल परिणय का भव्य आयोजन रखा गया है ।

इस मंगल अनुष्ठान का उद्देश्य समाज के सर्वांगीण विकास हेतु समाज में मितव्ययता, परिवारों में समानता एवं सौहार्दता, स्वस्थ्य मानसिकता , मिलनसारिता, प्रगतिशीलता एवं दूरदर्शिता स्थापित हो सके । इस आयोजन में विवाह में सम्मिलित होने वाले प्रत्येक पक्ष हेतु पंजीयन राशि रुपये 12,001 रुपये सुनिश्चित है । इच्छुक पक्ष रू. 2001 रुपये देकर पंजीयन करवा सकते हैं । शेष राशि दिनांक 20 जनवरी 2010 तक आवश्यक रूपसे जमा कराना होगी । यह कार्यक्रम आपका है इसमे ंसहयोग कर सफल बनाना आपका अपना सामाजिक व नैतिक दायित्व है ।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करे - कार्यालय प्रभारी गिरीश जोशी, 31-4, नार्थ राज मोहल्ला इंदौर-452002

Ajay Tripathi's picture

शर्मा एनएफएल के अध्यक्ष

नई दिल्ली । वी के शर्मा ने गुरूवार को नेशनल फर्टिलाइजर्स लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक का पद एवं कार्यभार ग्रहण किया । इससे पहले श्री शर्मा एनएफएल में निदेशक तकनीकी के रूप में एनएफएल के निदेशक मंडल में पदस्थ थे उन्हें एनएफएल के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक का अतिरिक्त कार्यभार भी सौंपा गया था ।

श्री शर्मा इलेक्ट्रिकल इंजीनियर है और वह 1974 से एनएफएल से जुड़े हए हैं । इन वर्षों के दौरान उन्होंने नंगल, विजयपुर एवं बठिण्डा यूनिटों में विभिन्न रस्तरों पर कार्य किया । वे वर्ष 2004 में बठिण्डा यूनिट के प्रमुख के रूप में कार्यरत थे इसस पहले वह कारपोरेट कार्यालय में मानव संसाधन विभाग के प्रमुख भी रहे । वर्ष 2006 में श्री शर्मा कंपनी के निदेशक (तकनीकी) के पद पर पदोन्नत हुए ।

वह ब्रह्मपुत्र वेली फर्टिलाईजर कार्पोरेशन लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भी हैं ।

Ajay Tripathi's picture

मुंबई में चतुर्मास सम्पन्न

विप्र वार्ता के अतिथि सम्पादक श्री श्री महामंडलेश्वर स्वामी सच्चिदानंद जी तीर्थ पीठाधिश्वर श्री चक्रमहामेरू पीठम् बिलासपुर छ.ग.  read more »

दानवीर शर्मा युवाओं के लिए प्रेरणादायी

बागबाहरा : आदिवासी बहुल पिछड़े अंचल के छोटे से कस्बे बागबाहरा से कोरिया तक की उड़ान भरने वाले शहीद कौशल यादव खेल पुरस्कार से सम्मानित अंतर्राष्ट्रीय पावर लिफ्टर आलोक द्विवेदी शासकीय नौकरी के लिए भटकने के बाद भी थका नहीं है । बड़े बड़  read more »

पुष्टिकर समाज का भक्तिपूर्ण आयोजन

रायपुर । रायपुर पुष्टिकर समाज द्वारा बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर में हिरण्यकश्यपु वध एवं नृसिंह अवतार की लीला का आयोजन हुआ । इससे पूर्व हिरम्यकश्यपु की अत्याचारकी लीला का प्रदर्शन जुलूस के माध्यम से किया गया । यह जुलूस गोपाल मंदिर सदर बाजार से प्रारंभ हुआ जो अम्बादेवी मंदिर सत्तीबाजार, बूढ़ापारा श्या मटाकीज रोड होते हुए बुढ़ेश्वर महादेव मंदिर पहुंचा ।

जुलूस में हिरण्यकश्यपु का अभिनय कर रहे थे राजकुमार व्यास, बच्चे बड़े जैसे ही भगवान श्री हरि की जयजयकार करते हरिण्यकश्यपु क्रोधित हो उन पर कपड़े से बने सोटे की मार लगाते । इस तरह हिरण्यकश्यपु द्वारा अत्याचारकी लीला को प्रतीकात्मक रूप से प्रदर्शित किया जाता रहा, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों समेत बच्चों ने खूब आनंद लिया । यह जुलूस मंदिर प्रांगण पहुंचा ।

वहां निर्मित खम्भेनुमा कोठी को फा्रकर भगवान नृसिंह प्रगट हुए उनका भयानक रूप देखते ही बन रहा था । भगवान नृसिंह के रूप में रमेश पुरोहित ने अत्यंत सजीव अभिनय किया । बुढ़ेश्वर मदिर के बाहर भगवान नृसिंह और हिरण्यकश्यपु मे ंपंजा से पंजा लड़ाकर युध्द हुआ हिरम्यकश्यपु बार बार सिंहासन के समीप खड़े प्रह्लाद के पास जाता, भक्त प्रह्लाद की छवि में देवाशीष कल्ला दर्शकों को मंत्र मुग्ध करते रहे ।  read more »

Shailendra Sharma's picture

अनुसूचित वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का अध्ययन

राजस्थान मे गुर्जर आंदोलन पुरी तरह आरक्षण के उन लाभों पर केन्द्रित है जिसकी भारतीय संविधान में विशेष व्याख्या की गई है । अनुसूचित जनजाति के उत्थान के लिए भारत सरकार समय समय पर विशेष कार्यक्रम और योजना प्रस्तावित करती रहती है ।

भारत में सैकड़ो जनजातियां पाई जाती है । एक जनजाति परिवारों या परिवारों के समूह का संकुल होती है, जिसका एक नाम होता है, जिसके सदस्य एक ही क्षेत्र में रहते हैं, विवाह और व्यवसाय से संबंधित कुछ निश्चित निषेधों का पालन करते हैं, एक ही भाषा बोलते हैं तथा लेन देन एवंर् कत्तव्यों के द्वारा बंधे हुए होते हैं । प्रत्येक जनजाति का अपना एक नाम होता है, सामान्य क्षेत्र, सामान्य भाषा और संस्कृति होती है ।

अनुसूचित जनजाति क्या है ? भारतीय संविधान के अनुच्छेद 341 और 342 के प्रावधानों के तहत राष्ट्रपति के आदेशों द्वारा अनुसूचित जनजाति का निर्धारण किया जाता है । 2001 की जनगणना के अनुसार भारत में अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 8.2 प्रशित है । भारत के संविधान के अनच्छेद 366 (25) में अनुसूचित जनजातियो ंको परिभााषित किया गया है।  read more »

Shailendra Sharma's picture

लुटियाभर सकारात्मक बुध्दि- सामाजिक दिशा के लिए उपयोगी

बसंत की चर्चा बसंत में और अदिक मुखर हो जाती है । बसंत का संदर्भ सरस्वती पूजा से जुड़ा है। सरस्वती को विद्या और ज्ञान की देवी माना गया है ।

जैसे शिशिर और हेमंत से ठिठुरती और धुंध, को हरे से भरी धरती पर बसंत के आगमन के साथ ही एक नई आभा प्रस्फुटित होने लगती है उसी तरह अविद्या और अज्ञान के अंधकार से ग्रस्त व्यक्ति के जीवन में विद्या और ज्ञान से एक नया प्रकाश जगमगा उठता है । विद्या व्यक्ति को मुक्त करती है ।

कहा भी गया है सा विद्या या विमुक्तये । विद्या व्यक्ति को विनय देती है । लेकिन कई बार पाया यह जाता है कि विद्या और ज्ञान पाकर व्यक्ति अहंकार से ग्रसित हो जाता है । उसके मन की निर्मलता और निश्छलता कहीं लुप्त हो जाती है । वह सहज और सरल नहीं रह पाता । व्यावहारिकता और दुनियादारी उसे चतुराई और चालाकी की ओर प्रवृत्त करती है । अपनी विद्या और ज्ञान के बल पर वह अपढ़ किन्तु सरल व्यक्ति को मूर्ख बनाने लगता है पर यह भी निश्चित है कि अंतत: सरलता ही व्यक्ति के काम आती है ।

शायद इसी संदर्भ में कबीर ने कहा है - 98183-0359059.
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय ।  read more »

Dhananjay Tripathi's picture

आजादी की तर्ज पर सामाजिक लड़ाई का नेतृत्व करें

बड़ी कामयाबियां हमेशा स्वत:स्फएर्त आंदोलनो ंसे चलकर निकलती है । देश की आजादी का आंदोलन भी किसी ने रूपरेखा बनाकर नहीं शुरू किया था । यह किसी एक मंलाकालेज पांडे का वैयक्तिक गुस्सा भी नहीं था । यह पूरे देशकी बगावत और गुस्सा था ।

जिसने अंग्रेजों को हिन्दुस्तान से खदेड़ दिया । अब आतंकवाद,नक्सलवाद को खदेड़ने की बारी है ।अगर युवा उठ खड़े हुए हैं तो इनमें इतना दम नहीं है कि वह उनका मुकाबला कर सके । ध्यान रखिये आजादी की लड़ाई का भी नेतृत्व उस जमाने के आम से लेकर खास युवाओं के ही हाथ में था । बड़ी लड़ाइयां महज वही सफलता हासिल नहीं करती, जिसका लक्ष्य लेकर लड़ी जाती है,5-6 बड़ी लड़ाइयां जब जीती जाती है तो वह तमाम दूसरे लक्ष्य भी हासिल कर लेती है जो पहले से भले निशाने पर न हो ।

योजनाओं का हिस्सा न हो, इसलिए अगर समाज उठ खड़ा हुआ है,1.7.1982बी.ए.,2.4.1978 युवा जाग गए हैं.. तो वह महजर् कत्तव्यों के विरूद्द ही समर नहीं जीतेंगे बल्कि समाज की तमाम दूसरी बीमारियों का भी इलाज कर देंगे ।  read more »

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